अतिथि अध्यापकों को नियमित करने लिए किए जा रहे आंदोलन से अध्यापकों के स्कूल न जाने सेविद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में अब स्कूलीशिक्षा निदेशालय ने विद्यार्थियों की खराब हो रही पढ़ाई
को गंभीरता से लिया और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारीको निर्देश जारी कर ऐसे अतिथि अध्यापकों की रिपोर्ट मांगी
है, जो गैर हाजिर चल रहे हैं। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसेसभी अतिथि अध्यापकों की रिपोर्ट दोपहर चार बजे प्रतिदिन
निदेशालय को भेजी जाए।प्रदेश भर के अतिथि अध्यापक नियमित किए जाने तथा सरप्लसबताकर हटाए गए अतिथि अध्यापकों को भी नौकरी में वापस लेनेकी मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। वे अनशन भी कर रहे हैं। 1 जुलाई सेगर्मी की छुट्टी के बाद स्कूल खुल चुके हैं, ऐसे में स्कूल लगने के बावजूदअतिथि अध्यापक स्कूल में नहीं जा रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई बुरी
तरह से प्रभावित हो रही है। कई स्कूलों में तो बाकायदा बच्चे हीशिक्षक बनकर अन्य बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। ऐसे में अब स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर प्रतिदिन दोपहर चार बजे गैर हाजिर रहने वाले अतिथि अध्यापकों की रिपोर्ट भेजने को कहा है। पत्र के साथ बाकायदा एक प्रोफार्मा भी भेजा गया है। इसमें अतिथि अध्यापक के पद का नाम, अतिथि अध्यापक का नाम, स्कूल का नाम, स्कूल कोड, लीव या गैर हाजिर के दौरान कहां होंगे तथा लीव रहने का कारण भी बताना होगा। कों की भी दें जानकारी मौलिक शिक्षा निदेशालय की तरफ से भी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी कर अन्य शिक्षकों की रिपोर्ट भी मांगी है, जो व्यक्तिगत या घरेलू कारण बताकर अतिथि अध्यापकों की हड़ताल में शामिल होने के लिए स्कूल से अनुपस्थित चल रहे हैं। इस कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधितहो रही है। ऐसे में स्कूल में अनुशासनहीनता पैदा हो रही है। इसीअनुशासनहीनता के कारण बच्चों के अभिभावक बच्चों को स्कूल मेंजने से कतराते हैं। ऐसे सभी शिक्षकों की सूची बनाकर ई-मेल पर भेजी
जाए।
को गंभीरता से लिया और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारीको निर्देश जारी कर ऐसे अतिथि अध्यापकों की रिपोर्ट मांगी
है, जो गैर हाजिर चल रहे हैं। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसेसभी अतिथि अध्यापकों की रिपोर्ट दोपहर चार बजे प्रतिदिन
निदेशालय को भेजी जाए।प्रदेश भर के अतिथि अध्यापक नियमित किए जाने तथा सरप्लसबताकर हटाए गए अतिथि अध्यापकों को भी नौकरी में वापस लेनेकी मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। वे अनशन भी कर रहे हैं। 1 जुलाई सेगर्मी की छुट्टी के बाद स्कूल खुल चुके हैं, ऐसे में स्कूल लगने के बावजूदअतिथि अध्यापक स्कूल में नहीं जा रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई बुरी
तरह से प्रभावित हो रही है। कई स्कूलों में तो बाकायदा बच्चे हीशिक्षक बनकर अन्य बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। ऐसे में अब स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर प्रतिदिन दोपहर चार बजे गैर हाजिर रहने वाले अतिथि अध्यापकों की रिपोर्ट भेजने को कहा है। पत्र के साथ बाकायदा एक प्रोफार्मा भी भेजा गया है। इसमें अतिथि अध्यापक के पद का नाम, अतिथि अध्यापक का नाम, स्कूल का नाम, स्कूल कोड, लीव या गैर हाजिर के दौरान कहां होंगे तथा लीव रहने का कारण भी बताना होगा। कों की भी दें जानकारी मौलिक शिक्षा निदेशालय की तरफ से भी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी कर अन्य शिक्षकों की रिपोर्ट भी मांगी है, जो व्यक्तिगत या घरेलू कारण बताकर अतिथि अध्यापकों की हड़ताल में शामिल होने के लिए स्कूल से अनुपस्थित चल रहे हैं। इस कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधितहो रही है। ऐसे में स्कूल में अनुशासनहीनता पैदा हो रही है। इसीअनुशासनहीनता के कारण बच्चों के अभिभावक बच्चों को स्कूल मेंजने से कतराते हैं। ऐसे सभी शिक्षकों की सूची बनाकर ई-मेल पर भेजी
जाए।
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